अर्वाचीन आयुर्वेद भाग 4

सिकंदर की विशाल सेना मैंकतिपय, यूनानी वेध भी थे, पस्तु अनेक ऐसे रोग ये जिनकी चिकित्सा वे न कर सकै । परंतु सिकंदर ने भारत में आकर र्देखा कि भारतीय वेय उनकी चिकित्सा सफलतापूर्वक करते थे । अतएव उसने अपने विजित प्रदेश में से भारतीय चिकित्सकों क्रो ही सेना के चिकिंत्सार्थ ऊँचेऊँचें पदों पर प्रतिष्ठित किया । यूनानी वैद्य सर्प विष की चिकित्सा से सर्वथा अनभिज्ञ ये । इस कारण उसने भारतीय विष वेधों को अपनी सेना में तो नियुक्त किया ही साथ ही लौटते समय अनेक विद्वान चिकित्सकों को अपने साय यूनान भी ले गया ।.उन दिनों तक यूनान में लोग सर्प बिष क्री चिकित्सा न जानते ये । वह यहाँ से गए हुए वैधों ने उन्हें सिखाई थी ।

323 ई. में सिवब्दर की मृत्यु हो जाने के पश्चात सैल्यूकस यूनानी साम्राज्य का प्रभावशाली सम्राट बन गया था । सेल्यूकस यद्यपि था तो सीरिया का राजा, परंतु उसने 15-20 वर्ष में समस्त ग्रीक साम्राज्य पर अपनी प्रभुता स्थापित कर ली थी । ग्रीक और भारतीय साम्राज्य के मध्य में अब कोई दूसरा स्वतंत्र साम्राज्य शेष न था । सैल्यूक्रस है त्मा को पूर्वीय सोभा भारतवर्ष से आ लगी थी । पर्वत से तेकर क्या, क्या और स्यार आदि स्यान भारतवर्ष कै ही अंतर्गत ये चंद्रगुप्त वीर्य से परास्त होम सैम्युक्स मैं अपनी पुत्री का बियाह चंद्रगुप्त के साथ कर दिया और अपना एक छ पौ पद्रगुप्त के राजदरबार मैं नियुक्त किया । इसका माम मैगाग्यनीत्र था । शांनीय षदुन समय तक पटना मैं रहा । अपने इस दीर्घकालीन भारत नियम उसने भारत का अत्यंत विस्तृत वर्णन लिखा था । उसने लिखा है कि भारनवर्ष मैं इस त्मा उपवनों मैं रहनेवाले श्रमणों की वहुत प्रतिष्ठा यी । इनके बाद दूमरे नंबर पर क्तिकों को प्रतिष्टा प्राप्त यी । ये श्रमण संन्यासी होते हुए चिकित्सक मी थे । हमने रिख्मी पंक्तियों मैं वन्टेसियस नामक पर्शियन (ईरानी) राजवेय का उल्लेख किया है । यर ईसा से 400 वर्ष पूर्व था । अपनी पुस्तक ‘इंडिया‘ में उसने भारतीय णेदों, कीडों, रा, गदर. साथी और तोते आदि पक्षियों का उल्लेख किया है । वह लिखता है कि प्राणीयों कौ सिरदर्द, वंतशूल, अक्षिशोय, मुखपाक और व्रण आदि रोग होने ही नहीं पै । इस प्रकार हम यह निरसंकोच कह सकते हैं कि उत्तरकाल कै प्रार’म युग में शां ही चिकित्सा विज्ञान में समस्त विश्व का गुरु गना दुआ था ओर भारतीय मथ पी आयुर्वेद से पूराम्पूरा लाम उठा रहे ये । भारतीय डी नहीं, ‘बीट्स’ नामक ययक ये सिद्ध किया है कि यूनानी चिकित्सकों को मी भारतीयों के देयक ग्रंथों से अच्छा शीशा धा और ये अपने उस भारतीय चिकित्सा विज्ञान फे कारण, जो उन्हे प्राप्त य, बाने आपकी थन्य तथा सफल समझते ये ।3 जय हम ओस की शा। करते हैं झ रडीनानिया; सीरिया ओर समस्त पश्विमीय पर्शिया के छोटेछोटे राष्ट्र मी उसी पे गाँ! ज्याने क्या ठीक उसी प्रकार भारतवर्ष का नाम तेने के साथ मी अफाक्ति रिक्शा क्या पर्शिया फी मिरन-मिन सत्ताओं कौ धूत जाना आवश्यक है की मांय भारत वर्ष कै हीं प्रांत थे ।

श्या क्यालिको कै अनुसार सभ्यता कै आदिम विकास स्थान सुपेरियर था ।

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