दुनिया के अजूबे

अर्वाचीन आयुर्वेद भाग 13

मणि भेद भारत कै निम्म प्रदेशों से प्राप्त ढोते ये” 1. सभाराष्ट्रक हीरक-विदर्भ (बरार) देश के अंतर्गत सथाराष्ट्र देश से प्राण र 2. काश्मीर रांष्ट्रक-काश्मीर देश से प्राप्य । 3. मध्यम राजक-कोशल देश कै अंतर्गत “मध्यम राष्ट्र‘ या मध्यदेश से प्राप्य ; 4. श्री कटनक-वेदोत्कट पर्वत से प्राप्य । 3. मणिमंतक-मणिमंत पर्बत से प्राप्य । …

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अर्वाचीन आयुर्वेद भाग 12

कच्ची धातु को पकाकर उससे पारा निकालना आना चाहिए । मणियों कै रंगरूप की पहचान होनी चाहिए । यदि वह यह बातें स्वयं न जानता हो तो वेसे विशेषज्ञ को अपने साथ रखे । शा में अंतर्निहित खानों को कच्ची धातु के भार, रंग; उग्र गंध तथा स्वाद के द्वारा पहवल्ला हो उस विभाग के …

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अर्वाचीन आयुर्वेद भाग 10

विकृत परिस्थिति से प्राणी हीं रोगी नहीं डी जाते, वल्कि ओषधियाँ मी रोगी हीं जाती हैं । अतएव आप्रेय का प्रधान आग्रह यह है कि दूषित परिस्थिति उत्पन होने से पूर्व ही औषधियों का संग्रह करके रखा जाए ताकि ये दूषित तत्वों से अमिव्याप्त न हाँ । विशेषता क्यों औषधियों का प्रयोग सामूहिक रोगों में …

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अर्वाचीन आयुर्वेद भाग 8

सारी व्यवस्था के लिए एक राजकीय स्थापित होती थी । एक समिति के कार्य के लिए भी वी कि यह वेश रखा जाता था । तुदर प्रवंध था कि वह आज तक किसी राजकीय शासन में नहीं हो सका 3 चंद्रगुप्त ने “धर्मस्यीय’ और ‘कंटक शोधन’ नाम कै दो प्रकार के न्यायालर्यों की स्थापना की …

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