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अर्वाचीन आयुर्वेद भाग 15

भारतीय दैवी देवताआँ कै माप कै साथ पल्लवित दुआ । चिकित्सा का मंत्रयान में पदार्पण और उसक अनुसंधान पवमान में कुछ लोग ऐसे भी ये जो प्राचीन चिकित्सा द्रव्यों का भी उपयोग करते थे और अंधभक्तों के लिए मंत्रन्तंत्रों का भी । उनक बेज्ञानिक परीक्षण इन द्रव्यों पर किसी न किसी रुप में चलते ही …

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अर्वाचीन आयुर्वेद

“जो रोगी की सेवा करता है, वह मेरी सेवा करता है ।’ इन उदार शब्दों के साथ मगवान् बुद्ध ने उत्तरकालीन युग की आधारशिला रखी थी । यही कारण हैकि हम आयुर्वेदिक विकास को दृष्टि से उत्तरकाल क्रो मध्यकाल से अधिक सीमाग्यशाली पाते हैँ । यह ठीक हे कि हम भगवान् बुद्ध को प्राणाचार्य नहीँ …

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