Skip to main content

CSIR-IMT चंडीगढ़ में साइंटिस्ट के पदों पर वैकेंसी

Image result for job
एसआईआर-इंस्टिट्यूट ऑफ माइक्रोबॉयल टेक्नोलॉजी (सूक्ष्मजीव प्रौद्योगिकी संस्थान, आईएमटी), चंडीगढ़ ने साइंटिस्ट के 13 पदों पर वैकेंसी निकाली हैं. ऑनलाइन अप्लीकेशन की अंतिम तिथि 19 मई है. www.imtech.res.in पर लॉग-इन कर ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है. 



सीनियर प्रिंसिपल साइंटिस्ट : 2 पद
योग्यता - बायॉलजिकल साइंसेज में पीएचडी व कम से कम 6 साल का अनुभव या एमडी/एमबीबीएस, पीएचडी व कम से कम 6 साल का अनुभव
आयु सीमा - अधिकतम 50 साल
वेतनमान - 131100-216600 रुपये

प्रिंसिपल साइंटिस्ट : 4 पद
योग्यता - बायॉलजिकल साइंसेज/फार्मास्युटिकल साइंसेज/लाइफ साइंसेज या केमिस्ट्री में पीएचडी + कम से कम न्यूनतम तीन साल का अनुभव, अथवा फार्मेकॉलजी में एमडी + न्यूनतम पांच साल का अनुभव
आयु सीमा - अधिकतम 45 साल
वेतनमान - 118500-214100 रुपये

सीनियर साइंटिस्ट : 4 पद
योग्यता -  बायॉलजिकल साइंसेज/फार्मास्युटिकल साइंसेज/लाइफ साइंसेज या केमिस्ट्री या बायॉलजिकल साइंस या बायोकेमिकल इंजीनियरिंग में पीएचडी एवं न्यूनतम दो साल का अनुभव, या बायोकेमिकल इंजीनियरिंग में एमटेक एवं न्यूनतम तीन साल का अनुभव
आयु सीमा: अधिकतम 37 साल
वेतनमान : 78800-209200



साइंटिस्ट : 3 पद
योग्यता -  बायॉलजिकल साइंसेज में पीएचडी, अथवा टैक्सोनॉमी ऑफ फुंगी/बैक्टीरिया/आर्किया/एल्गी या माइक्रोबायल डाइवर्सिटी/ईकॉलजी/इवॉल्युशन या मेटाजीनॉमिक्स, सिंथेटिक बायॉलजी/मेटाबोलिक इंजीनियरिंग में पीएचडी, अथवा बायोकेमिकल इंजीनियरिंग में पीएचडी या एमटेक
आयु सीमा - अधिकतम 32 साल
वेतनमान - 67700-208700 रुपये

चयन इंटरव्यू के माध्यम से होगा. 

आवेदन शुल्क
सामान्य/ओबीसी वर्ग के उम्मीदवारों को 100 रुपये का भुगतान करना होगा. महिला/एससी/एसटी/पीडब्ल्यूडी वर्ग के लिए कोई फीस नहीं है. फीस का भुगतान ऑनलाइन मोड से होगा

Comments

Popular posts from this blog

जायफल: स्वादिष्ट मसाले का खून भरा इतिहास

जायफल: स्वादिष्ट मसाले का खून भरा इतिहास आज हम ऐसे मसाले की बात करने वाले हैओ जिसे आम तौर ख़िर में छिड़का जाता है । जी हाँ , जायफल की ! आपको शायद ताजुब्ब होगा कि ज्यादातर लोग शायद इसकी उत्पत्ति के बारे में विशेष रूप से कुछ नही जाने हैं ।समें कोई संदेह नहीं है – यह सुपरमार्केट में मसाला गलियारे से आता है, है ना? लेकिन इस मसाले के पीछे दुखद और खूनी इतिहास छुपा छह है । लेकिन सदियों से जायफल की खोज में हजारों लोगों की मौत हो गई है। जायफल क्या है? सबसे पहले हम जानते है कि आखिर ये जायफ़ल है क्या ? तो ये नटमेग मिरिस्टिका फ्रेंगनस पेड़ के बीज से आता है । जो बांदा द्वीपों की लंबीसदाबहार प्रजाति है जो इंडोनेशिया के मोलुकस या स्पाइस द्वीप समूह का हिस्सा हैं। जायफल के बीज की आंतरिक गिरी को जायफल में जमीन पर रखा जाता है ।जबकि अरिल (बाहरी लेसी कवर) से गुदा निकलता है। जायफल को लंबे समय से न केवल भोजन के स्वाद के रूप में बल्कि इसके औषधीय गुणों के लिए भी महत्व दिया गया है। वास्तव में जब बड़ी मात्रा में जायफल लिया जाता है तो जायफल एक ल्यूकोसिनोजेन है जो मिरिस्टिसिन नामक एक साइकोएक्टिव केम

18 अनसुनी बाते ताजमहल की! यह बाते आपने कही नहीं सुनी होगी!!!

ताजमहल सिर्फ़ प्यार की निशानी ही नहीं हैं, बल्कि इसका नाम दुनिया के सात अजूबों में भी शुमार किया जाता है. इस खूबसूरत और प्यार की कहानी बयां करने वाली इमारत को किसने किस लिए बनवाया हम सब जानते हैं पर इसके बावजूद बहुत सी ऐसी बातें भी है जिन्हें हम नहीं जानते. हम आज आपको ताजमहल के उन्हीं रहस्यों के बारे में बता रहे हैं, जो इस खूबसूरत इमारत की चकाचौंध में नहीं दिखाई पड़ते. 1. मुमताज़ के मकबरे की छत पर एक छेद मकबरे की छत की छेद से टपकते पानी की बूंद के पीछे कई कहानियां प्रचलित है, जिसमें से एक यह है कि जब शाहजहां ने सभी मज़दूरों के हाथ काट दिए जाने की घोषणा की ताकि वे कोई और ऐसी खूबसूरत इमारत न बना सके तो मजदूरों ने ताजमहल को पूरा के बावजूद इसमें एक ऐसी कमी छोड़ दी जिससे शाहजहां का खूबसूरत सपना पूरा न हो सके. Source:  wallpaperup 2. ताजमहल के चारों ओर बांस का घेरा द्वितीय विश्व युद्ध, 1971 भारत-पाक युद्ध और 9/11 के बाद इस भव्य इमारत की सुरक्षा के लिए ASI ने ताजमहल के चारों और बांस का सुरक्षा घेरा बना कर उसे हरे रंग की चादर से ढक दिया था, जिससे ताजमहल दुश्मनों को नज़र न आये और इसे किसी प्रकार की