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LIVE Chandra Grahan 2018: जरुर देखे - भारत में दिखा पूर्ण चंद्र ग्रहण, इसलिए खास है इस बार का चंद्र ग्रहण

Chandra Grahan 2018: ग्रहण के अनिष्टकारी प्रभाव से बचने के लिए ग्रहण काल में स्नान, दान, मंत्र, तीर्थ स्नान करना मंगलकारी होता है। ग्रहणकाल में मूर्ति स्पर्श करना, निद्रा, भोजन करना, तेल लगाना, नाखून काटना वर्जित है। भारत में 76 मिनट के लिए लोग बिना टेलीस्कोप या उपकरण की मदद के अपनी आंखों से सीधे इस दुर्लभ खगोलीय घटना को देख सकते हैं।
Chandra Grahan 2018: ये कोई आसमान पर घटित होने वाली सामान्‍य प्राकृतिक घटना भर नहीं है बल्‍कि इसका प्रभाव मनुष्‍य, प्रकृति, जीव जंतुओं और सामजिक स्‍थितियों सभी पर पड़ता है। इस बार का चंद्र ग्रहण भी देश की सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक स्‍थितियों को प्रभावित करेगा। जहां रेल और हवाई दुर्घटनाओं में कमी आएगी वहीं आपराधिक मामलों में भी बढ़ोतरी आने की संभावना है, अगर महिलाओं से जुड़े अपराध घटेंगे तो भ्रष्‍टाचार के नए नए मामले सामने आ सकते हैं।
Chandra Grahan 2018: ये चंद्र ग्रहण अनोखा प्रभाव लेकर आया है। ये चंद्रग्रहण मात्र एक कर्मकांड से जुड़े लोगों के लिए ही नहीं बल्‍कि खगोलशास्‍त्रियों और वैज्ञानिकों के लिए भी महत्‍वपूर्ण है। ग्रहण की अवधि में बहुत कुछ ऐसा है जिसे सामान्‍य नहीं कहा जा सकता। ये अनोखी खगोलीय घटना है जो इससे पूर्व 1982 में देखी गई थी। इस दिन पूर्ण चंद्रग्रहण तो दिखेगा ही इसके अलावा एक समय होगा जब सुपर मून और ब्‍लू मून भी दिखाई देगा।

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जायफल: स्वादिष्ट मसाले का खून भरा इतिहास

जायफल: स्वादिष्ट मसाले का खून भरा इतिहास
आज हम ऐसे मसाले की बात करने वाले हैओ जिसे आम तौर ख़िर में छिड़का जाता है । जी हाँ , जायफल की ! आपको शायद ताजुब्ब होगा कि ज्यादातर लोग शायद इसकी उत्पत्ति के बारे में विशेष रूप से कुछ नही जाने हैं ।समें कोई संदेह नहीं है – यह सुपरमार्केट में मसाला गलियारे से आता है, है ना? लेकिन इस मसाले के पीछे दुखद और खूनी इतिहास छुपा छह है । लेकिन सदियों से जायफल की खोज में हजारों लोगों की मौत हो गई है। जायफल क्या है?

सबसे पहले हम जानते है कि आखिर ये जायफ़ल है क्या ? तो ये नटमेग मिरिस्टिका फ्रेंगनस पेड़ के बीज से आता है । जो बांदा द्वीपों की लंबीसदाबहार प्रजाति है जो इंडोनेशिया के मोलुकस या स्पाइस द्वीप समूह का हिस्सा हैं। जायफल के बीज की आंतरिक गिरी को जायफल में जमीन पर रखा जाता है ।जबकि अरिल (बाहरी लेसी कवर) से गुदा निकलता है। जायफल को लंबे समय से न केवल भोजन के स्वाद के रूप में बल्कि इसके औषधीय गुणों के लिए भी महत्व दिया गया है। वास्तव में जब बड़ी मात्रा में जायफल लिया जाता है तो जायफल एक ल्यूकोसिनोजेन है जो मिरिस्टिसिन नामक एक साइकोएक्टिव केमिकल के कारण होता…

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