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Showing posts from July, 2018

ये हैं कम्प्यूटर के KEYBOARD शॉर्टकट्स, बिना माउस के कर सकते हैं काम

ये हैं कम्प्यूटर के KEYBOARD शॉर्टकट्स, बिना माउस के कर सकते हैं काम नई दिल्ली  कम्प्यूटर का इस्तमाल आजकल हम सभी करते हैं । आज आपको ऐसे कुछ कीबोर्ड शॉर्टकट्स हैं जिनकी मदद से आप कंप्यूटर पर बिना माउस के काम कर सकते हैं। टैब को खोलना और बंद करनागूगल क्रोम या किसी दूसरे ब्राउजर के किसी टैब को Ctrl+W से बंद कर सकते हैं। पूरी विंडो बंद करने के लिए Ctrl+Shift+W दबाएं।अगर आपने गलती से कोई टैब बंद कर दिया है तो परेशान न हों Ctrl+Shift+T दबाएं। फॉन्ट साइज घटाना या बढ़ाना माइक्रोसॉफ्ट वर्ड में काम कर रहे हैं, तो फॉन्ट घटाने-बढ़ाने के लिए माउस या टचपैड पर हाथ ले जाने की जरुरत नहीं है। फॉन्ट साइज बढ़ाने के Ctrl+] और फॉन्ट साइज घटाने के लिए Ctrl+[ दबाएं।  विंडो का साइज घटाना-बढ़ाना विंडो को जूम आउट या जूम इन करने के लिए Ctrl के साथ + साइन दबाकर जूम इन और Ctrl के साथ – साइन दबाकर जूम आउट कर सकते हैं। दूसरे ऐप्लिकेशन या विंडो में जाने के लिए माउस पकड़ना परेशानी वाला काम लगता है। इसके लिए आप Alt+Tab का इस्तेमाल कर सकते हैं। विंडोज 7 और विंडोज 8 में आपको विंडोज बटन के साथ टैब बटन दबाना पड़ेगा।

ये ऐप तूफानी रफ्तार से फाइल ट्रांसफर करता है , पलक झपकते सेंड हो जाता है 1 GB डेटा

ये ऐप तूफानी रफ्तार से फाइल ट्रांसफर करता है , पलक झपकते सेंड हो जाता है 1 GB डेटा

इन दस स्थानों पर होती है रावण की पूजा!!!!!!

इन दस स्थानों पर होती है रावण की पूजा!!!!!! नवरात्रि के बाद दसवें दिन विजयादशमी का त्योहार मनाया जाता है, जिसे दशहरा कहते हैं। इस दिन परंपरा अनुसार रावण के पुतले का दहन कर, असत्य पर सत्य की विजय का पर्व मनाया जाता है। हमारी संस्कृति में भले ही रावण को खलनायक के रूप में देखा जाता हो, लेकिन हमारे ही देश में कुछ स्थान ऐसे भी हैं, जहां रावण का दहन नहीं बल्कि उस‍का पूजन किया जाता है। जी हां, यकीन नहीं होता, तो जानिए रावण के इन 10 मंदिरों के बारे में - 1 मंदसौर -मध्यप्रदेश के मंदसौर में रावण को पूजा जाता है। कहा जाता है कि मंदसौर का असली नाम दशपुर था, और यह रावण की धर्मपत्नी मंदोदरी का मायका था। इसलिए इस शहर का नाम मंदसौर पड़ा। चूंकि मंदसौर रावण का ससुराल था, और यहां की बेटी रावण से ब्याही गई थी, इसलिए यहां दामाद के सम्मान की परंपरा के कारण रावण के पुतले का दहन करने की बजाय उसे पूजा जाता है। मंदसौर के रूंडी में रावण की मूर्ति बनी हुई है, जिसकी पूजा की जाती है। 2 उज्जैन - मप्र के उज्जैन जिले के एक गांव में भी रावण का दहन नहीं किया जाता, बल्कि उसकी पूजा की जाती है। रावण का यह स्थान उज्जैन जिल…

पितृदोष और पितृशांति के लिए मंत्र. :::-

पितृदोष और पितृशांति के लिए मंत्र. :::-
**************************** पितृदोष क्या है और कैसे होता है:- जब किसी भी व्यक्ति की कुंडली के नवम पर जब सूर्य और राहू की युति हो रही हो तो यह समझा जाता है कि उसके पितृ दोष योग बन रहा है | भारतीय संस्कृति में पुराणों और शास्त्रों के अनुसार सूर्य तथा राहू जिस भी भाव में बैठते है, उस भाव के सभी फल नष्ट हो जाते है | यह योग व्यक्ति की कुण्डली में एक ऎसा दोष है जो सभी प्रकार के दु:खों को एक साथ देने की क्षमता रखता है, इस दोष को पितृ दोष के नाम से जाना जाता है | व्यक्ति की कुन्डली का नवम् भाव अथवा घर धर्म का सूचक है तथा यह पिता का घर भी होता है | इसलिए अगर किसी की कुंडली में नवम् घर में ग्रहों कि स्थिति ठीक नहीं है अर्थात खराब ग्रहों से ग्रसित है तो इसका तात्पर्य है कि जातक के पूर्वजों की इच्छायें अधूरी रह गयीं थी अत: इस प्रकार का जातक हमेशा तनाव में रहता है एवं उसे मानसिक, शारीरिक तथा भौतिक समस्याओं और संकटों का सामना कारण पडता है |
अत: सपष्ट है कि जातक का नवां भाव या नवें भाव का मालिक राहु या केतु से ग्रसित है तो यह सौ प्रतिशत पितृदोष के कारणों में म…

हिन्दू धर्म में कुछ संख्याओं का विशेष महत्व है -

हिन्दू धर्म में कुछ संख्याओं का विशेष महत्व है -
1) एक ओम्कार् (ॐ)
2) दो लिंग - नर और नारी ।
दो पक्ष - शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष।
दो पूजा - वैदिकी और तांत्रिकी।
दो अयन- उत्तरायन और दक्षिणायन।
3) तीन देव - ब्रह्मा, विष्णु, शंकर।
तीन देवियाँ - सरस्वती, लक्ष्मी, पार्वती।
तीन लोक - पृथ्वी, आकाश, पाताल।
तीन गुण - सत्वगुण, रजोगुण, तमोगुण।
तीन स्थिति - ठोस, द्रव, गैस।
तीन स्तर - प्रारंभ, मध्य, अंत।
तीन पड़ाव - बचपन, जवानी, बुढ़ापा।
तीन रचनाएँ - देव, दानव, मानव।
तीन अवस्था - जागृत, मृत, बेहोशी।
तीन काल - भूत, भविष्य, वर्तमान।
तीन नाड़ी - इडा, पिंगला, सुषुम्ना।
तीन संध्या - प्रात:, मध्याह्न, सायं।
तीन शक्ति - इच्छाशक्ति, ज्ञानशक्ति, क्रियाशक्ति।
4) चार धाम - बद्रीनाथ, जगन्नाथ पुरी, रामेश्वरम्, द्वारका।
चार मुनि - सनत, सनातन, सनंद, सनत कुमार।
चार वर्ण - ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र।
चार निति - साम, दाम, दंड, भेद।
चार वेद - सामवेद, ॠग्वेद, यजुर्वेद, अथर्ववेद।
चार स्त्री - माता, पत्नी, बहन, पुत्री।
चार युग - सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर युग, कलयुग।
चार समय - सुबह, शाम, दिन, रात।
चार अप्सरा - उर्वशी, रंभा, मेनका, तिलोत्तमा।
चार…

हम आपको बतायेगें कि किन परिस्थितियों में हुई “श्री शिव रुद्राष्टक स्तोत्र” की रचना ओर शिवरुद्राष्टक स्त्रोत भावार्थ सहित बतायेगें,,,,

मित्रो आज हम आपको बतायेगें कि किन परिस्थितियों में हुई “श्री शिव रुद्राष्टक स्तोत्र” की रचना ओर शिवरुद्राष्टक स्त्रोत भावार्थ सहित बतायेगें,,,, भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए अनेक मंत्र, स्तुति व स्त्रोत की रचना की गई है। इनके जप व गान करने से भगवान शिव अति प्रसन्न होते हैं। "श्री शिव रुद्राष्टक स्त्रोत्र" भी इन्हीं में से एक है। यदि प्रतिदिन शिव रुद्राष्टक का पाठ किया जाए तो सभी प्रकार की समस्याओं का निदान स्वत: ही हो जाता है। साथ ही भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है। नित्य,सोमवार,महाशिवरात्रि, श्रावण अथवा चतुर्दशी तिथि को इसका जप किया जाए तो विशेष फल मिलता है। श्री रामचरित्र मानस के उत्तर काण्ड में वर्णित इस रूद्राष्टक की कथा कुछ इस प्रकार है।कागभुशुण्डि परम शिव भक्त थे। वो शिव को परमेश्वर एवं अन्य देवों से अतुल्य जानते थे। उनके गुरू श्री लोमेश शिव के साथ-साथ राम में भी असिम श्रद्धा रखते थे। इस वजह से कागभुशुण्डि का अपने गुरू के साथ मत-भेद था। गुरू ने समझाया कि; स्वयं शिव भी राम नाम से आनन्दित रहते हैं तो तू राम की महिमा को क्यों अस्विकार करता है। ऐसे प्रसंग को शिवद्रोह…

यहाँ पे आप सरस्वती नदी को लुप्त होते हुऐ देख भी सकते हो.

पवित्र नदियों गँगा, यमुना और सरस्वती के बारे मे आपने सुना होगा. मगर देखा केवल गँगा यमुना को है. इस स्थान पर आकर सरस्वती नदी गुप्तगामिनि हो जाती है. ये जगह उत्तराखंड मे बद्रीनाथ से भी आगे भीमपुर के माणा गाँव के पास है. यहीं पर व्यास जी ने महाभारत लिखी थी मगर सरस्वती नदी के बहाव के शोर मे गणेश जी उनको नही सुन पा रहे थे. इसलिये व्यास जी ने उसे श्राप दिया और वो धरती के अंदर लुप्त हो गई. मजे की वात ये है कि यहाँ पे आप सरस्वती नदी को लुप्त होते हुऐ देख भी सकते हो. आप भी देखो और अपनी अगली पीढियों को भी दिखाओ.? अदभुद दर्शन है सरस्वती जी के । जिसने विडियो भेजा है उनका धन्यवाद
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